निदेशक का संक्षिप्त परिचय
डॉ. (श्रीमती) वैशाली नाईक ने दिनांक 01 फरवरी, 2026 को परिवर्ती ऊर्जा साइक्लोट्रॉन केन्द्र (पऊसाके), कोलकाता में निदेशक के पद का पदभार ग्रहण कर लिया है।
पुणे विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग से स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त कर उन्होंने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र प्रशिक्षण विद्यालय, मुंबई के 33वें बैच (बैच 1989-90) में प्रवेश लिया।
पऊसाके, कोलकाता के अपने प्रारम्भिक सेवाकाल में, उनका ध्यान प्रयोगात्मक नाभिकीय भौतिकी, विशेष रूप से, असामान्य नाभिकों की स्पेक्ट्रोदर्शी में विशेषज्ञता पर था। कालांतर में, उन्होंने भारतीय उद्योगों के सहयोग के साथ विरल समस्थानिक कणपुंज (आरआईबी) सुविधा के लिए कण त्वरकों के निर्माण हेतु भौतिकविदों एवं अभियंताओं के बहु-विषयक दलों का नेतृत्व किया।
उनकी प्रमुख उपलब्धियों में इलेक्ट्रॉन साइक्लोट्रॉन अनुनाद (ईसीआर) आयन स्रोत का अभिकल्पन एवं विकास, भारी-आयन रेडियो आवृति क्वाड्रुपोल (आरएफक्यू) लिनेक, एवं नॉवेल गैस-जेट ईसीआर तकनीक शामिल है। इससे पऊसाके की विरल समस्थानिक कणपुंज (आरआईबी) सुविधा में विरल समस्थानिक कणपुंज का पहला सफल उत्पादन संभव हो सका। अस्थिर एवं विरल आयन कणपुंज की प्रगत राष्ट्रीय सुविधा (अनुरिब) परियोजना के समन्वयक के रूप में, उन्होंने पऊसाके के नए राजारहाट परिसर में अगली-पीढ़ी के त्वरकों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की, जो विरल आयन कणपुंज सुविधा (आरआईबी) के तकनीक के माध्यम से अल्पकालिक नाभिकों एवं चिकित्सा आइसोटोप के नाभिकीय गुणों पर अनुसंधान एवं विकास के लिए प्रोटॉन साइक्लोट्रॉन पर केन्द्रित हैं।
डॉ. नाईक को वर्ष 2006 में परमाणु ऊर्जा विभाग का वैज्ञानिक एवं तकनीकि उत्कृष्टता पुरस्कार एवं वर्ष 2010 एवं 2012 में समूह उपलब्धि पुरस्कार से सम्मान प्राप्त है। नाभिकीय स्पेक्ट्रोदर्शी एवं त्वरक पर उनके 100 से अधिक प्रकाशन हैं, जिसमें उनकी सह-लेखित पुस्तक –‘रेयर आइसोटोप बीम्स: कॉन्सेप्ट्स एंड टेक्नीक्स’ (सीआरसी प्रेस, 2022) भी शामिल है। डॉ. नाईक को चलचित्र (सिनेमा) एवं हिंदी, मराठी और बांग्ला गाने सुनने पसंद है।
